आज मैं अपनी हिंदी की पढ़ाई के बारे में बताना चहती हूँ |
जब मैं एक हाई स्कूल की छात्रा थी, तब भारतीय संकृति में रूचि लेने लगी |
फिर भारत के बारे में खबरों की खोज करने लगी और पहली बार हिंदी भाषा का पता चला |
तो विश्वविद्ध्यालय में हिंदी पढ़ने का फैसला किया क्योंकि मेरे मन में जिज्ञासा पैदा हुई थी |
मैने इस भाषा के स्वर और वर्णमाला दोनों ही बहुत पसंद किये थे |
शुरुआत में, शब्दों का उच्चारण ठीक करना और देवनागरी सीखना सबसे कठिन बात थी |
इसके आलावा, एक बातचित या एक पाठ समझने के लिए मुझे बहुत-से नए शब्द सिखने पड़ते थे |
धीरे धीरे मेरी समझ में बेहतरी हुई हैं, खासकर जब से बॉलीवुड की फिल्मों देखने लगी हूँ |
मेरी भारत में यात्रा के बाद, मुझे मालूम हुआ कि बात ठीक कह पाने के लिए अभ्यास करने की ज़रूरत है |
हालाँकि मैं काफी पढ़ रही हूँ, फिर भी इतनी गलतियाँ कर रही हूँ, जिन से मुझे लज्जा आती है !
मैं ध्यान से पढ़ती रहूँगी, इसलिए कि हर बेहतरी मुझे संतोष का अनुभव कराती है | फिर भारत के बारे में खबरों की खोज करने लगी और पहली बार हिंदी भाषा का पता चला |
तो विश्वविद्ध्यालय में हिंदी पढ़ने का फैसला किया क्योंकि मेरे मन में जिज्ञासा पैदा हुई थी |
मैने इस भाषा के स्वर और वर्णमाला दोनों ही बहुत पसंद किये थे |
शुरुआत में, शब्दों का उच्चारण ठीक करना और देवनागरी सीखना सबसे कठिन बात थी |
इसके आलावा, एक बातचित या एक पाठ समझने के लिए मुझे बहुत-से नए शब्द सिखने पड़ते थे |
धीरे धीरे मेरी समझ में बेहतरी हुई हैं, खासकर जब से बॉलीवुड की फिल्मों देखने लगी हूँ |
मेरी भारत में यात्रा के बाद, मुझे मालूम हुआ कि बात ठीक कह पाने के लिए अभ्यास करने की ज़रूरत है |
हालाँकि मैं काफी पढ़ रही हूँ, फिर भी इतनी गलतियाँ कर रही हूँ, जिन से मुझे लज्जा आती है !
